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उड़ी-हमला हुआ तो लब तलक खोले नहीं - बोलो : डॉ राहुल अवस्थी 

डॉ राहुल अवस्थी
                
                                                         
                            उड़ी-हमला हुआ तो लब तलक खोले नहीं - बोलो 
                                                                 
                            
विपक्षी के लिये दो बोल भी बोले नहीं - बोलो

गंवाये लाल हमने यूं किसी से कम न था कोई
मगर बेशर्म आंखों में कहीं भी ग़म न था कोई

हमारे शेर जागे तो तुम्हारी बुझ गयी बाती
फटा क्या-क्या : कहें क्या-क्या- फटी आंखें, फटी छाती आगे पढ़ें

हमारी जीत से जैसे

8 वर्ष पहले

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