उड़ी-हमला हुआ तो लब तलक खोले नहीं - बोलो
विपक्षी के लिये दो बोल भी बोले नहीं - बोलो
गंवाये लाल हमने यूं किसी से कम न था कोई
मगर बेशर्म आंखों में कहीं भी ग़म न था कोई
हमारे शेर जागे तो तुम्हारी बुझ गयी बाती
फटा क्या-क्या : कहें क्या-क्या- फटी आंखें, फटी छाती
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हमारी जीत से जैसे
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