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शैल चतुर्वेदी: 40 पार करते ही तुम पर इश्क़ का भूत सवार होगा...

Shail chaturvedi funny poems on love
                
                                                         
                            आज से बीस साल पहले 
                                                                 
                            
हमें
एक ज्योतिषी ने बतलाया था
चालीस पार करते ही
तुम पर इश्क़ का
भूत सवार होगा
और एक ख़ूबसूरत कन्या से
तुम्हारा प्यार होगा
इक्तालीस में
क़दम रखते ही
ज्योतिषी का कथन 
रंग लाया
और हमने अपना विचार
जब एक दोस्त को बतलाया
तो वो हंसा
फिर हम पर व्यंग्य कसा
'इस उम्र में इश्क़ फ़रमाओगे
सारा विचार धरा रह जाएगा
हां जूते खाओगे।'
हमने पूछा-
'इश्क़ का जूते से क्या सम्बन्ध है?'
वो बोला-"हर मजनूं की किस्मत
लैला की जूती में बन्द है।
हमने कहा-आप तो यों कह रहे हैं
मानो इस मामले में
बड़ा दखल रखते हैं।
वो बोला-दखल ही नहीं
हम तो जूते खाने का भी बल रखते हैं
लैला तो लैला
हमने लैला के बाप तक के खाए हैं
और निन्यान्वे तक तो
यों मुस्कुराए हैं
जैसे कोई बात नहीं
फिर जूता टूट जाने पर
मारने वाले से पूछा है
पिताजी!
क्या आपके पास लात नहीं?
सच पूछो शैल भाई
तो इस मामले में
हमारे सर के बालों ने
बड़ा काम किया है
तुम्हारे सर पर तो हैं ही नहीं
जूता पड़ते ही, बोलने लगेगा
दूसरा ब्रम्हरंध्र खोलने लगेगा
तीसरे में समाधी ले लोगे
और चौथे में
बड़े भैया, बराबर हो लोगे
पहली बार
पहला जूता
हमारे सर पर पड़ते ही
हमारी आंखो के सामने
तारे नाचने लगे थे
और दूसरे में तो हम
रामायण बांचने लगे थे
तुम्हारे मुंह से तो
राम का नाम भी नहीं निकलेगा
और "राम नाम सत्य" भी
कोई दूसरा ही बोलेगा
फिर मौका पड़ने पर
न तो तुम भाग सकते हो
न कोई
दीवार लांघ सकते हो
छिपने पर भी
नहीं छिपोगे 
भीड़ में भी घुस जाओगे
तो अलग दिखोगे
सच पूछो शैल चतुर्वेदी
तो तुम्हारी बॉडी का कंस्ट्रक्शन
इश्क़बाजी के ख़िलाफ़ है
लैला यह समझेगी
की मजनूं नहीं
मजनूं का बाप है
फिर ज़्यादा गड़बड़ करोगे
तो बन्द हो जाओगे
पिट-पिट कर
नई कविता के छन्द हो जाओगे।"
हमने पूछा-"ये नई कविता के छन्द 
क्या बला है?"
वो बोला-"बेवक़ूफ़ बनाने की कला है
नई कविता का सूरज
ख़ून की कै करता है
चन्द्रमा मवाद फेंकता है
किरण को टी.बी. हो जाती है
दिन दहाड़ता है
रात रंभाती है
तम तमतमाता है
उल्लू गाता है
कोयल किटकिटाती है
मैना मुस्कुराती है
और नई कविता के बारे में
इतना ही जानता हूं
ज़्यादा जानना चाहते हो
तो किताब खरीद लाओ
पढ़-पढ़ कर सिर पीटना
रातों को
पागलों की तरह चीखना
वैसे आज कल की मुहब्बत भी
तुम्हे इसके सिवाय क्या देगी
क्योंकी आज कल की नई छोकरी भी
नई कविता से क्या कम है
मरघट में बैठकर गाती है
'ये प्यार का मौसम है'
जीते जी
मरघट जाना चाहते हो
तो एस्ज्क़ फरमाओ
वर्ना घर जाकर
चुपचाप
भाभी जी के पैर दबाओ
जूते खाने से
पैर दबाना अच्छा
और मजनूं का बाप कहलाने से
जोरू का ग़ुलाम कहलाना अच्छा।


-शैल चतुर्वेदी  

साभार- कविता कोश
 
9 वर्ष पहले

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