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लाशों पर चढ़ कर आगे फौज बढ़ेगी: दिनकर 

लाशों पर चढ़ कर आगे फौज बढ़ेगी: दिनकर
                
                                                         
                            किरिचों पर कोई नया स्वप्न ढोते हो ?
                                                                 
                            
किस नयी फसल के बीज वीर ! बोते हो ?

दुर्दान्त दस्यु को सेल हूलते हैं हम; 
यम की दंष्ट्रा से खेल झूलते हैं हम।
वैसे तो कोई बात नहीं कहने को,
हम टूट रहे केवल स्वतंत्र रहने को।

सामने देश माता का भव्य चरण है,
जिह्वा पर जलता हुआ एक, बस प्रण है,
काटेंगे अरि का मुण्ड कि स्वयं कटेंगे,
पीछे, परन्तु, सीमा से नहीं हटेंगे। आगे पढ़ें

7 वर्ष पहले

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