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रमाशंकर यादव 'विद्रोही'

इरशाद

'विद्रोही' औरतों की पीड़ा को दर्ज करते हैं- औरतें रोती जाती हैं, मरद मारते जाते हैं

काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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मामला चाहे तलाक का हो या दहेज का, किसी भी तरह का शोषण हो, स्त्रियां इस पीड़ के केन्द्र में रही हैं। यह अलग बात है कि इतिहास औरतों के कुर्बानियों से भी पटा पड़ है।

लेकिन इसके बावजूद जब-जब स्त्रियों पर अत्याचार हुआ तब-तब कवि हृदय घायल हुआ और उनकी पीड़ा को कहीं न कहीं कलमबंद किया। कवि रमाशंकर यादव 'विद्रोही' स्त्री मन की व्यथा को अपनी कविता में कुछ इस तरह दर्ज करते हैं-  

कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से कूदकर जान दी थी
ऐसा पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज है
और कुछ औरतें अपनी इच्छा से चिता में जलकर मरी थीं
ऐसा धर्म की किताबों में लिखा हुआ है

मैं कवि हूँ, कर्त्ता हूँ
क्या जल्दी है आगे पढ़ें

...जो श्रीमानों ने औरतों और बच्चों के खिलाफ पेश किए हैं

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