आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कैफ़ी आज़मी की नज़्म: तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई 

पुलवामा में शहीद हुए जवानों का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ
                
                                                         
                            रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई 
                                                                 
                            
तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई 

डरता हूँ कहीं ख़ुश्क न हो जाए समुंदर 
राख अपनी कभी आप बहाता नहीं कोई 

इक बार तो ख़ुद मौत भी घबरा गई होगी 
यूँ मौत को सीने से लगाता नहीं कोई 

माना कि उजालों ने तुम्हें दाग़ दिए थे 
बे-रात ढले शम्अ बुझाता नहीं कोई 

साक़ी से गिला था तुम्हें मय-ख़ाने से शिकवा 
अब ज़हर से भी प्यास बुझाता नहीं कोई 

हर सुब्ह हिला देता था ज़ंजीर ज़माना 
क्यूँ आज दिवाने को जगाता नहीं कोई 

अर्थी तो उठा लेते हैं सब अश्क बहा के 
नाज़-ए-दिल-ए-बेताब उठाता नहीं कोई 
7 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर