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गांधी की आस्था को उनके मनपसंद भजन से समझिए....

Mahatma Gandhi
                
                                                         
                            वैष्णव जन तो तेने कहिये जे
                                                                 
                            
पीर परायी जाणे रे

पर- दुख्खे उपकार करे तो ये
मन अभिमान ना आणे रे
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे ॥
 

सकल लोक मा सहुने वंदे
निंदा न करे केनी रे
वाच काछ मन निश्चल राखे
धन- धन जननी तेनी रे
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे ॥



सम-दृष्टी ने तृष्णा त्यागी
पर- स्त्री जेने मात रे
जिह्वा थकी असत्य ना बोले
पर- धन नव झाले हाथ रे
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे ॥
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7 वर्ष पहले

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