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कैलाश सत्यार्थी: खून से सनी रोटियों के साथ चिपकी पड़ी हैं जो रेल की पटरियों पर

कैलाश सत्यार्थी
                
                                                         
                            खून से सनी रोटियों के साथ चिपकी पड़ी हैं जो 
                                                                 
                            
रेल की पटरियों पर, वो मेरी उंगलियां हैं 
बड़ी मेहनत से कमाई थी वे रोटियां 
लंबे सफ़र के लिए बचाई थी वे रोटियां 

रोते-रोते मुझे छोड़कर मां भूखी सो पाई होगी?
उसने तो बांधकर रख दी थी घर के पूरे आटे की रोटियां
शहर तक के मेरे लंबे सफ़र के लिए 
नहीं मालूम था कि कुछ रास्ते एकतरफा होते हैं  आगे पढ़ें

6 वर्ष पहले

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