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हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली- डाॅ. राहुल अवस्थी

हिंदी दिवस पर कविता
                
                                                         
                            इल्ज़ाम पे इल्ज़ाम की घटाएँ हैं छायी
                                                                 
                            
तोहमतों पे तोहमतें गयी हैं मुझ पे लगायी
दो बातें करने मैं तुम्हारे पास हूँ आयी
दुनिया की हर ज़बान से भरी मेरी झोली
हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली

आत्मा में मैंने पालि की मर्याद समेटी
प्राकृत के तेवरों में मैं गयी हूँ लपेटी
नातिन हूँ संस्कृत की मैं अपभ्रंश की बेटी
हमजोली बोलियों की ताबोआब सँजो ली
हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली

आवेश दिया है मुझे भूषण के छंद ने

बिजली-सा किया है मुझे दिनकर अमन्द ने
आवेश दिया है मुझे भूषण के छंद ने
मुझको बना दिया है शब्दवेधी चंद ने
जयसिंह की चेतना की आँख मैंने ही खोली 
हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली

रसखान ने लज़्ज़त का मेरी जाम पिया है
कबिरा ने, जायसी ने मुझे आम किया है
ख़ुसरो ने हिन्दवी-सा मुझे नाम दिया है
रहिमन ने कलाई पे मेरी बाँधी है मोली
हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली
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आवेश दिया है मुझे भूषण के छंद ने

6 वर्ष पहले

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