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अग्निपथ : वृक्ष हों भले खड़े, हों घने हों बड़े...

हरिवंश राय बच्चन
                
                                                         
                            हरिवंश राय श्रीवास्तव "बच्चन" का जन्म 27 नवम्बर 1907 को हुआ।  हिन्दी भाषा के एक कवि और लेखक थे।'हालावाद' के प्रवर्तक बच्चन जी हिन्दी कविता के उत्तर छायावाद काल के प्रमुख कवियों मे से एक हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति मधुशाला है। भारतीय फिल्म उद्योग के प्रख्यात अभिनेता अमिताभ बच्चन उनके सुपुत्र हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। बाद में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में हिन्दी विशेषज्ञ रहे। अनन्तर राज्य सभा के मनोनीत सदस्य। बच्चन जी की गिनती हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवियों में होती है। देहांत 18 जनवरी, 2003 को हुआ।  
                                                                 
                            
 
प्रमुख कृतियां- तेरा हार, मधुशाला (1935), मधुबाला (1936),  मधुकलश (1937), निशा निमंत्रण (1938), एकांत संगीत (1939) आदि संग्रह 

-हरिवंश राय बच्चन-

वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने हों बड़े,
एक पत्र छांह भी,
मांग मत, मांग मत, मांग मत,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

तू न थकेगा कभी,
तू न रुकेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रु श्वेत रक्त से,
लथपथ लथपथ लथपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

साभार- कविता कोश 
 
9 वर्ष पहले

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