मुबारक मुबारक नया साल सब को
न चाहा था हम ने तू हम से जुदा हो
मगर किस ने रोका है बहती हवा को
जो हम चाहते हैं वो कैसे भला हो
ऐ जाते बरस तुझ को सौंपा ख़ुदा को
मुबारक मुबारक नया साल सब को
मुबारक घड़ी में ये हम अहद कर लें
ब-सद-शान हम ज़िंदगी में सँवर लें
गुलों की तरह गुलिस्ताँ में निखर लें
बनें हम भी सूरज गगन में उभर लें
मुबारक मुबारक नया साल सब को
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