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गोपालदास नीरज: निर्माण घृणा से नहीं प्यार से होता है साथी !

gopaldas neeraj
                
                                                         
                            यह नफरत की बारूद न बिखराओ साथी !
                                                                 
                            
यह युद्धों का ज़हरीला नारा बंद करो 
जो प्यार तिजोरी सेफ़ों में है तड़प रहा 
उसके बंधन खोलो, उसको स्वच्छंद करो !

मृत मानवता जिंदगी मांगती है तुमसे
दो बूंद स्नेह की उसके प्राणों में ढालो
आदम का यह जो स्वर्ग हो रहा मरघट 
जाओ ममता का एक दिया उसमें बालो!

निर्माण घृणा से नहीं प्यार से होता है 
सुख-शांति खड्ग पर नहीं फूल पर चलते हैं,
आदमी देह से नहीं नेह से जीता है  
बम्बों से नहीं वज्र से बोल पिघलते हैं 

तुम डरो न, आगे आओ निज भुज फैलाओ
है प्यार जहां, तलवार वहां झुक जाती है
पतवार प्रेम की छू जाए जिस किश्ती को 
मझधार पार उसको खुद पहुंचा आती है 
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8 वर्ष पहले

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