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मत कहो, आकाश में कुहरा घना है: दुष्यंत कुमार

इरशाद

मत कहो, आकाश में कुहरा घना है: दुष्यंत कुमार

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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मत कहो, आकाश में कुहरा घना है,
यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है ।

सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह से,
क्या करोगे, सूर्य का क्या देखना है ।

इस सड़क पर इस क़दर कीचड़ बिछी है,
हर किसी का पाँव घुटनों तक सना है । आगे पढ़ें

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