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जरा-सी बात है मुँह से निकल न जाए कहीं: दुष्यंत कुमार 

दुष्यंत कुमार
                
                                                         
                            नज़र-नवाज़ नज़ारा बदल न जाए कहीं
                                                                 
                            
जरा-सी बात है मुँह से निकल न जाए कहीं

वो देखते हैं तो लगता है नींव हिलती है
मेरे बयान को बंदिश निगल न जाए कहीं
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7 वर्ष पहले

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