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कुछ जलचित्र-कुछ जलचिह्न, बाढ़ से घिरे गाँव: प्रेमरंजन अनिमेष

कुछ जलचित्र-कुछ जलचिह्न, बाढ़ से घिरे गाँव: प्रेमरंजन अनिमेष
                
                                                         
                            1- कोशिश
                                                                 
                            

देखता हूँ
अपनी काग़ज़ की
नाव हटा कर

क्या इससे
कुछ कम होता है
जलस्तर...

2- पंचनामा

आग धधक रही थी पहले से

फिर माटी पर
पानी फिरा
पानी पर पवन

टूटा नहीं आसमान...
सरकार का बयान

3- सवाल

कितना कुछ धुला
कितना बह गया
इस बारिश में

मगर कहाँ बहे
जस के तस रहे

औरतों के आँसू
भूखों की लाचारियाँ
आम अवाम की परेशानियाँ...

4- वाकिफ

उसका आना तय था
पर कोई तैयार न था

यह आसपास का
ऐसा खेल था
जिसमें हर कोई पकड़ा गया...

5- समता

भीतर तक हैं तर सब

एक समान हो गए
खड्डे रास्ते नाले
यहाँ से वहाँ तक
भेद कोई नहीं

यह धरती पर
समानता लाने की
कोशिश आसमानी...! आगे पढ़ें

7 वर्ष पहले

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