1- कोशिश
देखता हूँ
अपनी काग़ज़ की
नाव हटा कर
क्या इससे
कुछ कम होता है
जलस्तर...
2- पंचनामा
आग धधक रही थी पहले से
फिर माटी पर
पानी फिरा
पानी पर पवन
टूटा नहीं आसमान...
सरकार का बयान
3- सवाल
कितना कुछ धुला
कितना बह गया
इस बारिश में
मगर कहाँ बहे
जस के तस रहे
औरतों के आँसू
भूखों की लाचारियाँ
आम अवाम की परेशानियाँ...
4- वाकिफ
उसका आना तय था
पर कोई तैयार न था
यह आसपास का
ऐसा खेल था
जिसमें हर कोई पकड़ा गया...
5- समता
भीतर तक हैं तर सब
एक समान हो गए
खड्डे रास्ते नाले
यहाँ से वहाँ तक
भेद कोई नहीं
यह धरती पर
समानता लाने की
कोशिश आसमानी...!
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