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अल्लामा इक़बाल: है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़ 

अल्मामा इक़बाल: है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़ 
                
                                                         
                            लबरेज़ है शराब-ए-हक़ीक़त से जाम-ए-हिंद 
                                                                 
                            
सब फ़लसफ़ी हैं ख़ित्ता-ए-मग़रिब के राम-ए-हिंद 

ये हिन्दियों की फ़िक्र-ए-फ़लक-रस का है असर 
रिफ़अत में आसमाँ से भी ऊँचा है बाम-ए-हिंद 

इस देस में हुए हैं हज़ारों मलक-सरिश्त 
मशहूर जिन के दम से है दुनिया में नाम-ए-हिंद 

है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़ 
अहल-ए-नज़र समझते हैं इस को इमाम-ए-हिंद 

एजाज़ इस चराग़-ए-हिदायत का है यही 
रौशन-तर-अज़-सहर है ज़माने में शाम-ए-हिंद 
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6 वर्ष पहले

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