एक फ़सल जो सितारों ने बोयी थी
किसने इसे चोर गोदामों में डाल लिया
बादल की बोरी को झाड़ कर देखा
रात की मंडी में गर्द उड़ रही है...
चांद एक भूखे बछड़े की तरह
सूखे थनों को निचोड़ रहा है
धरती मां अपने थान पर बंधी है
आकाश की चरनी को चाट रही है
2-
अस्पताल के दरवाजे पर
हक़, सच, ईमान और क़द्रें
जाने कितने ही लफ़्ज़ बीमार पड़े हैं
एक भीड़ सी इकट्ठी हो गई है
जाने कोई नुस्ख़ा लिखेगा
जाने वह नुस्ख़ा लगा जाएगा
लेकिन अभी तो ऐसा लगता है
इनके दिन पूरे हो गये
3-
इस शहर में एक घर
घर कि जहां बेघर रहते हैं
जिस दिन कोई मजदूरी नहीं मिलती
उस दिन वे परेशान रहते हैं
बुढ़ापे की पहली रात
उनके कानों में धीरे से कह गयी
कि शहर में उनकी
भरी जवानी चोरी हो गई...
4-
कल रात बला की सर्दी थी
आज सुबह सेवा समिति को
एक लाश सड़क पर मिली है
नाम व पता कुछ मालूम नहीं है
श्मशान में आग लग रही है
लाश पर रोने वाला कोई नहीं
या तो कई भिखारी मरा होगा
या शायद कोई फ़लसफ़ा मर गया...
5-
किसी मर्द के आगोश में
कोई लड़की चीख उठी
जैसे उसके बदन से कुछ टूट गिरा हो
थाने में एक क़हक़हा बुलंद हुआ
क़हवाघर में एक हंसी बिखर गयी
सड़कों पर कुछ हाॅकर फिर रहे हैं
एक-एक पैसे में ख़बर बेच रहे हैं
बचा-खुचा जिस्म फिर से नोच रहे हैं...
6-
गुलमोहर के पेड़ों तले
लोग एक-दूसरे से मिलते हैं
ज़ोर से हंसते हैं, गाते हैं
एक-दूसरे से अपनी- अपनी
मौत की ख़बर छुपाना चाहते हैं
संगमरमर क़ब्र की तावीज़ है
हाथों पर उठाए फिरते हैं
और अपनी लाश की हिफ़ाजत कर रहे हैं...
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X