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दिल्ली इस शहर का नाम है: अमृता प्रीतम 

दिल्ली इस शहर का नाम है: अमृता प्रीतम
                
                                                         
                            एक फ़सल जो सितारों ने बोयी थी 
                                                                 
                            
किसने इसे चोर गोदामों में डाल लिया 
बादल की बोरी को झाड़ कर देखा 
रात की मंडी में गर्द उड़ रही है...

चांद एक भूखे बछड़े की तरह 
सूखे थनों को निचोड़ रहा है 
धरती मां अपने थान पर बंधी है 
आकाश की चरनी को चाट रही है 

2- 

अस्पताल के दरवाजे पर 
हक़, सच, ईमान और क़द्रें 
जाने कितने ही लफ़्ज़ बीमार पड़े हैं 
एक भीड़ सी इकट्ठी हो गई है 

जाने कोई नुस्ख़ा लिखेगा 
जाने वह नुस्ख़ा लगा जाएगा 
लेकिन अभी तो ऐसा लगता है 
इनके दिन पूरे हो गये 

3- 
इस शहर में एक घर 
घर कि जहां बेघर रहते हैं 
जिस दिन कोई मजदूरी नहीं मिलती 
उस दिन वे परेशान रहते हैं 

बुढ़ापे की पहली रात 
उनके कानों में धीरे से कह गयी 
कि शहर में उनकी 
भरी जवानी चोरी हो गई...

4- 
कल रात बला की सर्दी थी 
आज सुबह सेवा समिति को 
एक लाश सड़क पर मिली है 
नाम व पता कुछ मालूम नहीं है 

श्मशान में आग लग रही है 
लाश पर रोने वाला कोई नहीं
या तो कई भिखारी मरा होगा 
या शायद कोई फ़लसफ़ा मर गया...
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7 वर्ष पहले

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