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शैल चतुर्वेदी: उल्लू बनाती हो... ?

Ulloo banati ho shail chaturvedi
                
                                                         
                            
एक दिन मामला यों बिगड़ा
कि हमारी ही घरवाली से
हो गया हमारा झगड़ा
स्वभाव से मैं नर्म हूँ
इसका अर्थ ये नहीं
के बेशर्म हूँ
पत्ते की तरह काँप जाता हूँ
बोलते-बोलते हाँफ जाता हूँ
इसलिये कम बोलता हूँ
मजबूर हो जाऊँ तभी बोलता हूँ
हमने कहा-"पत्नी हो
तो पत्नी की तरह रहो
कोई एहसान नहीं करतीं
जो बनाकर खिलाती हो
क्या ऐसे ही घर चलाती हो
शादी को हो गये दस साल 
अक्ल नहीं आई
सफ़ेद हो गए बाल
पड़ौस में देखो अभी बच्ची है
मगर तुम से अच्छी है
घर कांच सा चमकता है
और अपना देख लो
देखकर खून छलकता है
कब से कह रहा हूँ
तकिया छोटा है
बढ़ा दो
दूसरा गिलाफ चढ़ा दो
चढ़ाना तो दूर रहा
निकाल-निकाल कर रूई
आधा कर दिया
और रूई की जगह
कपड़ा भर दिया
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रूमाल कि जगह पैंट से निकल आया मोज़ा...

8 वर्ष पहले

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