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काका हाथरसी की चुटकियां और उनसे जुड़ा एक मज़ेदार वाक़या

Kaka hathrasi selected hasya kavita
                
                                                         
                            

काका हाथरसी का असली नाम प्रभु लाल गर्ग था। लेकिन वह काका कैसे बन गए इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। दरअसल प्रभु दयाल 'काका' के नाम से नाटक किया करते थे, इससे उन्हें ख़ासी प्रसिद्धि भी मिली। इसके बाद उन्होंने काका का नाम अपने लेखन में भी जोड़ लिया और हाथरस का होने की वजह से वह हाथरसी हुए। काका को संगीत का भी ज्ञान था, उन्होंने संगीत कार्यालय की भी स्थापना की थी जो क्लासिकल संगीत की मैगेज़िन छापा करती थी। काका हाथरसी कवि सम्मेलनों के एक चर्चित नाम थे और दूर-दूर से लोग उनकी कविताएं सुनने आया करते थे। भारत सरकार ने 1985 में काका जी को पद्मश्री से सम्मानित भी किया था। 

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काका की लिखी चुनिंदा कविताएं

4 वर्ष पहले

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