आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

गोपाल प्रसाद व्यास की हास्य कविता ‘हाय न बूढ़ा मुझे कहो तुम’

Gopl prasad vyas hasya kavita hay na boodha mujhe kaho tum
                
                                                         
                            

हाय, न बूढ़ा मुझे कहो तुम! 
शब्दकोश में प्रिये, और भी
बहुत गालियां मिल जाएंगी 
जो चाहे सो कहो, मगर तुम
मेरी उमर की डोर गहो तुम! 

हाय, न बूढ़ा मुझे कहो तुम!
क्या कहती हो-दांत झड़ रहे? 
अच्छा है, वेदान्त आएगा। 
दाँत बनाने वालों का भी
अरी भला कुछ हो जाएगा। 

बालों पर आ रही सफेदी

बालों पर आ रही सफेदी,
टोको मत, इसको आने दो।
मेरे सिर की इस कालिख को 
शुभे, स्वयं ही मिट जाने दो।

जब तक पूरी तरह चांदनी
नहीं चांद पर लहराएगी,
तब तक तन के ताजमहल पर
गोरी नहीं ललच पाएगी। 

आगे पढ़ें

बालों पर आ रही सफेदी

7 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर