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गोपाल प्रसाद व्यास की हास्य कविता ‘हाय न बूढ़ा मुझे कहो तुम’

Gopl prasad vyas hasya kavita hay na boodha mujhe kaho tum
                
                                                         
                            

हाय, न बूढ़ा मुझे कहो तुम! 
शब्दकोश में प्रिये, और भी
बहुत गालियां मिल जाएंगी 
जो चाहे सो कहो, मगर तुम
मेरी उमर की डोर गहो तुम! 

हाय, न बूढ़ा मुझे कहो तुम!
क्या कहती हो-दांत झड़ रहे? 
अच्छा है, वेदान्त आएगा। 
दाँत बनाने वालों का भी
अरी भला कुछ हो जाएगा। 

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बालों पर आ रही सफेदी

7 वर्ष पहले

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