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गोपाल दास व्यास: जूतों को ज़रा बचाना तुम !

गोपाल दास व्यास: जूतों को ज़रा बचाना तुम !
                
                                                         
                            जी, कुछ भी बात नहीं थी,
                                                                 
                            
अच्छा-बीछा घर से आया था।
बीवी ने बड़े चाव से मुझको,
बालूजा पहनाया था।

बोली थीं, “देखो, हंसी नहीं,
जब कभी मंच पर जाना तुम।
ये हिन्दी का सम्मेलन है,
जूतों को ज़रा बचाना तुम!” आगे पढ़ें

7 वर्ष पहले

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