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World Book Fair Delhi 2026: ‘भारतीय मुसलमान: एकता का आधार — हब्बुल वतनी (राष्ट्रीयता)’ के अंग्रेज़ी अनुवाद का

हलचल
                
                                                         
                             विश्व पुस्तक मेला के प्रतिष्ठित मंच पर आज पुस्तक ‘भारतीय मुसलमान: एकता का आधार — हब्बुल वतनी (राष्ट्रीयता)’ के अंग्रेज़ी अनुवाद का विधिवत विमोचन किया गया। यह पुस्तक भारतीय मुसलमानों की राष्ट्रीय चेतना, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक एकता के वैचारिक आधार को सशक्त एवं तथ्यपरक रूप में प्रस्तुत करती है।
                                                                 
                            

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं विचारक डॉ. इंद्रेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हब्बुल वतनी यानी मातृभूमि से प्रेम भारतीय संस्कृति का मूल संस्कार है, जिसे किसी एक पंथ या समुदाय तक सीमित नहीं किया जा सकता। भारतीय मुसलमानों ने सदैव राष्ट्र की एकता, अखंडता और गरिमा की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह पुस्तक ऐतिहासिक तथ्यों और वैचारिक स्पष्टता के साथ उसी सत्य को सामने लाती है और राष्ट्रीय एकता के विमर्श को मजबूती प्रदान करती है।

प्रो. परीक्षित मन्हास (डायरेक्टर, CEC–UGC) ने अपने विचार रखते हुए कहा कि यह पुस्तक अकादमिक जगत के लिए अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि यह राष्ट्रीयता की अवधारणा को समावेशी दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में ऐसे ग्रंथों की आवश्यकता है जो समाज और राष्ट्र के बीच सेतु का कार्य करें।

प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी (डायरेक्टर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी, शिमला) ने कहा कि यह कृति भारतीय मुसलमानों की ऐतिहासिक और वैचारिक भूमिका को संतुलित ढंग से रेखांकित करती है। उन्होंने इसे समकालीन भारत में सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय संवाद को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पुस्तक बताया।

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. मनु शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह पुस्तक भारतीय राष्ट्रवाद को केवल राजनीतिक अवधारणा के रूप में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक चेतना के रूप में स्थापित करती है। भारतीय मुसलमानों की पहचान को राष्ट्र के साथ जोड़ते हुए यह कृति आज के समय में फैली अनेक भ्रांतियों को दूर करने में सहायक है।

हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के रजिस्ट्रार प्रो. पी. एस. उपाध्याय ने कहा कि यह पुस्तक शोधार्थियों, शिक्षकों और नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में उपयोगी सिद्ध होगी।

पुस्तक के अंग्रेज़ी अनुवाद की अनुवादक डॉ. शबीना शेख ने कहा कि इस अनुवाद का उद्देश्य भारतीय मुसलमानों के राष्ट्रबोध और हब्बुल वतनी की भावना को वैश्विक पाठकवर्ग तक पहुँचाना है, ताकि भारत की समावेशी राष्ट्रीयता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सही परिप्रेक्ष्य में समझा जा सके।

कार्यक्रम में प्रकाशक एवं ‘किताबवाले’ के डायरेक्टर श्री प्रशांत जैन भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल एक प्रकाशन नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक वैचारिक संवाद और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

 
8 महीने पहले

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