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फिरोजाबाद जनपद के 33 वें स्थापना दिवस के पुण्य अवसर पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन 

हलचल
                
                                                         
                            प्रज्ञा हिंदी सेवा संस्थान ट्रस्ट, फिरोजाबाद के तत्वावधान में दिनांक 5 फरवरी 2022,शनिवार को बसंत पंचमी एवं फिरोजाबाद जनपद के 33 वें स्थापना दिवस के पुण्य अवसर पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किड्स कार्नर हैप्पी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रांगण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम अध्यक्ष पद्मेश श्रीवास्तव पद्मेश ने गोष्ठी का विधिवत शुभारंभ करते हुए माँ सरस्वती की वंदना की। अमन तैनुगुरिया 'शौर्य' ने नेताओं पर व्यंग्य करते हुए कहा "जमकर करता रेलियाँ, नेता है बेशर्म। जनता को सिखला रहा, दो गज दूरी धर्म।।" 
                                                                 
                            

पूरन चंद्र गुप्ता जी ने पढ़ा "शारदे माँ शारदे सद् ज्ञान का अवतार दे। हो रहा चहुँदिश अँधेरा तू अँधेरा टार दे।" ट्रस्ट अध्यक्ष यशपाल 'यश' ने सरस्वती को अपने गाँव में आने आ आमंत्रण देते हुए कहा "शारदे अइयो मेरे गाम। सुबह शाम पलकों से पोंछू मइया तेरे पाम।" 

सूरज सरस्वती को बुलाते हुए पढ़ा-  "पास में आओ पलभर बैठो,गीतों का गुणगान करो। गीत अधूरा है ये तुम बिन, आकर अपना ज्ञान भरो।" नवोदित कवि दुर्गेश सिंह ने पढ़ा "ये जिंदगी हमें कहाँ ले जा रही है। आज फिर मुझे अपने गाँव की याद आ रही है।"

 के.के. आमद साधूपुरी ने सरस्वती से प्रार्थना करते हुए अपनी काव्य पंक्तियां पढ़ी- "माँ भूखे लाचारों को सहारा दो। मजधार में डूबतों को किनारा दो।" विष्णु उपाध्याय विशु ने पढ़ा "प्रीति की रीति तुम भी निभाया करो। हो खता गर मेरी तो बताया करो।" मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप चंद्र जैन जी ने बसंत के दहे सुनाकर गोष्ठी को रस मय कर दिया। उन्होंने इस प्रकार पढ़ा "जब से खिला पड़ोस में, एक बसंती फूल। नागफनी रातें हुईं,दिन हो गये बबूल।।" 
 

डॉ. अजिर बिहारी चौबे जी ने बसंत के आगमन पल अपनी कविता पढ़ी- "दुःख दर्दों का हो निकट अंत। छाया बसंत लो दिग्दिगंत।" ट्रस्ट के प्रबंधक सचिव युवा कवि कृष्ण कुमार "कनक" ने राष्ट्रीय चेतना की रचना पढ़ते हुए कहा "चलो जोड़ें वीणा के तार। करें मिल राष्ट्रभक्ति संचार। लगाएँ जीवन नौका पार। थामकर हाथों में पतवार। निकलकर नारों के स्वर से, समर्पण को दें जीवन दान। बनेगा भारत तब गतिमान, बनेगा भारत तभी महान।" 

कार्यक्रम अध्यक्षता कर रहीं पद्मेश श्रीवास्तव ने सरस्वती माँ के कल्याणकारी स्वरूप का वर्णन करते हुए प्रार्थना की "हे हंस बाहनी ब्रह्मसुता, तुम जन-जन का कल्याण करो। अब मूक पड़ी है जीवन वीणा,उसे स्वरों का दान करें।" कार्यक्रम के समापन पर ट्रस्ट के साहित्य संयोजक कुँ. राघवेंद्र पाल सिंह जादौन ने सभी आगंतुक कवियों और अतिथियों का आभार प्रकट किया। 
4 वर्ष पहले

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