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कहीं न कहीं, हम सब बेचारे, दर्द के मारे: सुधा गुप्ता

Popular haiku of sudha gupta
                
                                                         
                            हाइकु जापानी शैली की लघु कविता है। इसमें 17 वर्ण होते हैं और इसे तीन पंक्तियों में लिखा जाता है। पहली पंक्ति में पांच वर्ण, दूसरी में सात, और तीसरी में फिर पांच वर्ण होते हैं।
                                                                 
                            

चांदी की नाव
सोने के डांड लगे
रेत में धंसी।
 * * *
नींद खुमारी
सिरहाना न मिला
पत्थर सही।
  * * *
हमसफ़र 
मेरे गुन न गिने
खोट हि देखे।
  * * *
मैं दूर्वा भली 
उजाड़ खण्डहर
कहीं भी पली।
  * * *
तुम दूध थे 
मिली बनके पानी
सदा ही जली।
  * * *
बन्दिनी मैना 
सोने की सलाखों में
रूठे हैं गीत।
  * * *
फेन, तिनके
माथे धरे सागर
रत्न डुबा दे।
  * * *
नाज़ुक फूल 
संकरे गुलदान
जान पे बनी।
  * * *
लिखते पेड़ 
हरियाले काग़ज़
प्रेम की पाती। 
  * * *
कहीं न कहीं
हम सब बेचारे 
दर्द के मारे।

- सुधा गुप्ता 

साभार-  कविता कोश
7 वर्ष पहले

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