रुत सावन
जो मन भावन तो
जग पावन
भाव भरे हों
मन के मन में ही
संवाद हो
प्रेम प्रतीक
ऋतु बसंत न और
विवाद हो
मृदा है देह
अमूल्य मात्र स्नेह
बूंद का मेह
जोड़ जोड़ के
जान बनी है आज
कर ले काज
अब तो मान
जीवन के नियम
और संबंध।
- जयंत पटेल
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