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भाव भरे हों, मन के मन में ही संवाद हो

                
                                                         
                            रुत सावन
                                                                 
                            
जो मन भावन तो
जग पावन

भाव भरे हों
मन के मन में ही
संवाद हो

प्रेम प्रतीक
ऋतु बसंत न और
विवाद हो

मृदा है देह
अमूल्य मात्र स्नेह
बूंद का मेह

जोड़ जोड़ के
जान बनी है आज
कर ले काज

अब तो मान
जीवन के नियम
और संबंध।

- जयंत पटेल 

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8 वर्ष पहले

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