कवि विजय ठाकुर का यह गीत-ग्रंथ उनके जीवन के अनेक अनुभवों का दस्तावेज है। इस संग्रह में लिखे उनके गीत और कविताएं अनूठी हैं। विविध रंगों में रंगा कवि का मन आयु के तीन चरणों में विचरण करता है। मनोभावनाओं का सजीव चित्रण, कल्पना और यथार्थ का सहज समन्वय, कविताओं को सरस बनाता है। इस संग्रह के गीत भारतीय संस्कृति, जीवनशैली और देश प्रेम की भावना के साथ पाठकों के सामने आते हैं।
किताब- यह अपने भारत की माटी
कवि- विजय ठाकुर
प्रकाशक- श्री गांधी पुस्तकालय, शाहजहांपुर
मूल्य- 500 रुपये
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