हिंदी पत्रिकाओं में अपनी विशिष्ट पहचान बना रही लखनऊ से प्रकाशित 'नाद रंग' का नया अंक विद्याधर व्यास पर केंद्रित हैं। अपने जीवन के 75 वर्ष मना चुके विद्याधर व्यास की प्रतिष्ठा एक शास्त्रीय गायक के साथ ही संगीत संस्थानों के कुशल प्रशासक और संगीतशास्त्री की रही है। वे भातखंडे संगीत संस्थान सम विश्वविद्यालय के कुलपति, संगीत रिसर्च अकादमी में अधिशासी निदेशक और मुंबई विश्वविद्यालय में संगीत विभागाध्यक्ष रहे हैं। अंक का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनकी अब तक की संगीत यात्रा के बारे में चर्चा है।
किताब- नाद रंग (अंक तीन)
संपादक और प्रकाशक- आलोक पराड़कर, लखनऊ
मूल्य- 100 रुपये
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