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मेरी हनुमान चालीसा: भक्ति-शक्ति का अनुपम संग्रह...

meri hanuman chalisa book review in hindi
                
                                                         
                            

 ‘माई हनुमान चालीसा’ ऐसी किताब है, जिसकी अनुवाद सहित व्याख्या है, जो मूलतः अत्यंत सरल-सहज है और करोड़ों लोगों को मुंहजबानी याद है।

देवदत्त पटनायक समय-समय पर हिंदू धार्मिक किताबों का सहज पाठ, अंग्रेजी में रूपांतरित करते रहते हैं। "जय" नाम से महाभारत का संक्षिप्त रूप, उन्होंने अंग्रेजी में लिखा है, जो किशोरों को महाभारत से परिचित करवाने में एक कामयाब भूमिका निभाता है। साथ ही भगवद्गीता सहित कुछ ग्रन्थों पर वे अंग्रेजी में टीका भी लिखते रहे हैं। आजकल जब हमारा युवा वर्ग इस हालत में है कि उसे भारतीय दर्शन ही नहीं, मामूली से मामूली उक्ति भी अंग्रेजी के माध्यम से समझ में आती है, तो निश्चित ही, देवदत्त पटनायक एक प्रासंगिक और उपयोगी काम कर रहे हैं। भले वह जटिल और बहुआयामी को सरल और एकांगी बनाकर पेश करें। सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप की दुनिया तक सीमित युवा वर्ग के लिए कुछ हद तक, उनकी किताबें एक बृहत दुनिया खोलती हैं। भरत तिवारी ने मूल अवधी में लिखी हनुमान चालीसा की उनकी अंग्रेजी में अनुवाद सहित व्याख्या, ‘माई हनुमान चालिसा’ का हिन्दी में अनुवाद (मेरी हनुमान चालीसा) करके इस कार्य को कुछ और उपयोगी और लोकप्रिय बना दिया है।

‘माई हनुमान चालीसा’...

‘माई हनुमान चालीसा’ ऐसी किताब है, जिसकी अनुवाद सहित व्याख्या है, जो मूलतः अत्यंत सरल और सहज है और करोड़ों लोगों को मुंहजबानी याद है। जैसा खुद पटनायक कहते हैं, उसका पाठ उनके विचलित या भयभीत मन को सुकून पहुंचाता है। जाहिर है उसका धार्मिक क्रिया होना या न होना बेमानी है। शांति देती है तो देती है, बात खत्म। कोई भी लय-ताल, संगीत, कविता यह काम कर सकती है। जरूरत इतनी भर है कि मन में पक्का यकीन हो कि वह ऐसा कर सकती है। इसके साथ यह भी तय है कि हर कविता (यहां दोहा) के कुछ अर्थ होतेे हैं, जिनकी पड़ताल या व्याख्या हर व्यक्ति अपने मन मुताबिक कर सकता है। देवदत्त पटनायक ने हनुमान चालीसा के दोहों की एक अत्यंत सहज स्वीकार्य व्याख्या की है, जिससे किसी का कोई विरोध नहीं हो सकता। यह अपने में एक सुखद स्थिति है और सुकून पहुंचाने का वह काम जारी रखती है, जो हनुमान चालीसा का पाठ करता आया है।

भरत तिवारी ने पटनायक की इस सहज व्याख्या का, हिंदी में सटीक अनुवाद किया है। उसके लिए उन्हें साधुवाद। पुस्तक के गद्य भाग के अनुवाद में रवानी भी है और रस भी। लालित्य और सहजता उसके गुण हैं, जो इस पुस्तक के लिए अनिवार्य भी थे। जहां तक दोहों का सवाल है, जिन्हें इस पुस्तक में छंद कहा गया है और वे छंद में ही हैं।

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‘माई हनुमान चालीसा’...

8 वर्ष पहले

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