हिंदी के चर्चित और महत्वपूर्ण कवि नवल की पंक्तियां हैं- ‘जब लिखने के लिए लिखी जाती है कविता, तो वह कविता नहीं, कविता का स्वांग-भर होती है।’ यह सत्य है कि कविता सायास नहीं लिखी जा सकती, कविता तो उतरती है विचारों के आकाश से मन की धरा पर और लिपट-चिपट जाती है कोरे कागज से, जैसे मिलती है कोई मां अपनी संतान से एक अंतराल के बाद। संभवतः इसीलिए कविता लिखना दिनचर्या के किसी अनिवार्य कार्य से निवृत्त होने का नाम नहीं है।
विशाखा तिवारी की सद्यः प्रकाशित काव्य-कृति ‘हथेलियों में चांदनी’ की 46 कविताओं से गुजरते हुए यह स्पष्ट हो जाता है कि ये कविताएं स्फूर्त रूप से सृजित हैं, उत्पादित नहीं हैं। संग्रह की कविताएं जहां एक ओर अलग-अलग सामाजिक विषयों को सशक्त रूप से उठाती हैं, वहीं दूसरी ओर प्रेम की मिठास को अपनी ही तरह से अभिव्यक्त करती हैं। कविताओं में शब्द, अर्थ में घुल जाते हैं और अर्थ, शब्दों की दिव्यदेह धारण कर अनुभूति को चरमोत्कर्ष तक पहुंचाते हैं।
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