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पारिवारिक, सामाजिक और ग्लोबल - हाईवे ई 47 की कहानियां...

पारिवारिक, सामाजिक और ग्लोबल - हाईवे ई 47 की कहानियां...
                
                                                         
                            प्रवास में हिन्दी लेखन करते हुए दो चर्चित उपन्यासों की रचयिता अर्चना पैन्यूली का कहानी संग्रह हाईवे ई 47 2018 में प्रकाशित हुआ है। संग्रह की भूमिका में विख्यात कथाकार ममता कालिया कहती हैं  'अर्चना पैन्यूली की रचनाओं में सांस्कृतिक विभेद, विस्थापन के फलस्वरूप उपजे प्रवासियों के जीवन संघर्ष, नये और पुराने मूल्यों की खींचातानी प्रभावी ढंग से उभर कर आती है.... कथ्य और शिल्प के इलाके में उनकी कहानियों में हमें मुक्त पवन के झोंकों का एहसास होता है. ..उनकी कहानियों में रोचकता कभी भी भंग नहीं होती.’ 
                                                                 
                            

1995 से 2017 तक देश-विदेश में हुए अनुभवों को गूंथती ये बारह कहानियां उपरोक्त कथन का साक्ष्य बनती  हैं। हौसला और साहस इन कहानियों में दर्ज स्त्रियों  को परिभाषित करता है। इन स्त्रियों के बहाने लेखिका स्त्री मात्र के भीतर-बाहर के उस संसार को उद्घाटित करती है, जो अपनी असहायता और अकेलेपन के बावजूद जुझारू है, लक्ष्योन्मुख है।
 
संकलन की पहली कहानी की मुख्य पात्र ‘अनुजा’ एक नई और अच्छी जिन्दगी की तलाश में देहरादून से डेनमार्क आई, पर यहां उसे चुनौतियों से भरी जिन्दगी की जंग मिली। माता-पिता की मृत्यु के बाद भाइयों ने एक तलाकशुदा दो बच्चों के बाप से अनुजा की शादी कर दी। एक अच्छी जिन्दगी जीने की हक़दार अनुजा को परदेश में नई भाषा, नए तौर-तरीके सीखने के अतिरिक्त अपने पति की बेवफाई झेलनी पड़ी। पति की आकस्मिक मृत्यु के बाद अनुजा के पास आंसू बहाने का समय भी नहीं था, मौत के बाद वे काफी पेचीदे मामले छोड़ गए थे – वह दूसरी औरतों से शादियाँ रचाकर इल-लीगल तरीकों से उन्हें डेनमार्क में सेटल करवा कर पैसा ऐंठता था। अनुजा और बच्चों को दांव पर रखकर नरेंद्र मल्होत्रा ने जिस सपना से काग़जी शादी की थी, वही सपना नरेंद्र की आकस्मिक मौत के बाद अनुजा और उसके बच्चों का हक छीनने लगी।
 
स्त्री विमर्श की कैसी भी बहस का अंग बने बिना कहानी स्त्री की दुनिया के सच को, उसके उद्वेलन को न केवल हमारे सामने लाती है, बल्कि एक सकारात्मक राह निकालती है। आगे पढ़ें

7 वर्ष पहले

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