अगर भारतीय राजनीति के करिश्माई व्यक्तित्वों की चर्चा की जाए, तो वह अमित शाह के बिना पूरी नहीं हो सकती। वे भाजपा अध्यक्ष के रूप में अपने सफल कार्यकाल के बाद अब देश के गृहमंत्री बन चुके हैं। अपनी राजनीतिक गतिविधियों के कारण अमित शाह मीडिया की चर्चा में तो खूब रहते हैं और उनके विषय में अनेक लोग जानना भी चाहते हैं, मगर उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन के विषय में जानकारी प्राप्त करने का कोई ठोस और प्रामाणिक स्रोत अब तक उपलब्ध नहीं था। फुटकर रूप से ही जानकारियां मिलती थीं। ऐसे में, लेखकद्वय अनिर्बान गांगुली और शिवानन्द द्विवेदी की पुस्तक ‘अमित शाह एंड द मार्च ऑफ बीजेपी’ इस कमी को काफी हद तक पूरा करती है।
इस पुस्तक में भाजपा की विकास-यात्रा के साथ-साथ एक सामान्य कार्यकर्ता से भाजपा अध्यक्ष तक अमित शाह के राजनीतिक सफर का भी तथ्यपरक ढंग से सविस्तार वर्णन किया गया है। साथ ही, उनके निजी जीवन के जाने-अनजाने पहलुओं पर भी नजर डाली गई है। दूसरे शब्दों में कहें तो इस किताब में एक तरफ भारतीय राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले राजनेता अमित शाह हैं, तो दूसरी तरफ अपनी नन्ही-सी पोती रुद्री के साथ खेलते हुए सब कुछ भूल जाने वाले दादा अमित शाह भी हैं। यह किताब भाजपा अध्यक्ष के रूप में अमित शाह के राजनीतिक कार्यकलापों, नवाचारों व प्रयोगों पर गहराई तक जाकर चर्चा करती है
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