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फराज़ की मोहब्बत को लोग आँख भर के देखते हैं

अहमद फ़राज़
                
                                                         
                            
अहमद फ़राज़ को 'इश्क़ का शायर' कहा जाता है। उनकी ग़ज़लों और नज़्मों में रूमानियत इस कदर नुमाया होती है कि मोहब्बत के परिंदे अपने हर राग में फ़राज़ को ही गुनगुनाते हैं। उन्होंने अपने हर्फ़ों को प्रेम का ऐसा मुलम्मा चढ़ाया है कि सब उस पर हक़ कर लेना चाहते हैं। फ़राज़ साहब की यह ग़ज़ल भी शब्दों की ऐसी नक्काशी है कि आप इसके आकर्षण में न सिर्फ़ खिंचे चले आएंगे बल्कि उसके दीदार को भी मचल उठेंगे जिसका ज़िक्र इसमें किया गया है।
पढ़िए यह विस्मृत कर देने वाली रचना

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं...

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं 
सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं

सुना है रब्त है उसको ख़राब हालों से 
सो अपने आप को बरबाद कर के देखते हैं 

सुना है दर्द की गाहक है चश्म-ए-नाज़ उसकी 
सो हम भी उसकी गली से गुज़र के देखते हैं 

सुना है उसको भी है शेर-ओ-शायरी से शगफ़ 
सो हम भी मोजज़े अपने हुनर के देखते हैं 

सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं 
ये बात है तो चलो बात कर के देखते हैं 

सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है 
सितारे बाम-ए-फ़लक से उतर के देखते हैं 

सुना है हश्र हैं उसकी ग़ज़ाल सी आँखें 
सुना है उस को हिरन दश्त भर के देखते हैं 
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सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं...

8 वर्ष पहले

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