पिथौरागढ़ जिले में वन्यजीवों की दहशत से हर कोई परेशान हैं। कहीं बंदर-लंगूर तो कहीं तेंदुआ, जंगली सुअर और भालुओं की दहशत है। धारचूला तहसील के दारमा घाटी के 14 गांवों में भालुओं ने जमकर उत्पात मचाया है। ग्रामीणों के मुताबिक, भालुओं ने कई घरों की छत और दरवाजे तोड़ डाले हैं और भीतर रखा राशन चट गए हैं तो अन्य सामान को खासा नुकसान पहुंचाया है। बौन गांव के ग्रामीण भालुओं से निजात दिलाने की मांग पर 150 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय पहुंचे। कहा कि हमारे घरों में भालुओं का डेरा है और वन विभाग हमारी सुध नहीं ले रहा है। ऐसे में उनका गांवों में रहना मुश्किल हो गया है। बौन गांव की महिलाएं सरपंच छुरपी देवी के नेतृत्व में कलक्ट्रेट पहुंची। उन्होंने कहा कि दारमा घाटी के 14 गांवों के ग्रामीण ठंड के चलते निचले इलाकों में लौटे हैं। ग्रामीणों का गांवों में आना-जाना जारी है। जब बीते दिनों ग्रामीण बौन, मार्छा सहित अन्य गांवों में पहुंचे तो भालुओं ने इनके घरों में जमकर उत्पात मचाया है। कई घरों की छतें और दरवाजे तोड़ डाले हैं। भीतर रखा सारा राशन भालू चट कर गए हैं। वहीं अन्य सामान को भी भालुओं ने खासा नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि ऐसे में उनके लिए अपने घरों में जाना भी मुश्किल हो गया है। वन विभाग से कई बार भालुओं से निजात दिलाने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की। नियमित तौर पर गश्त कर सुरक्षा देने को कहा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपने पैतृक गांवों में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। यही हाल रहे तो घाटी के सभी गांव वीरान हो जाएंगे। ग्रामीणों ने डीएम को ज्ञापन देकर उचित कदम उठाने की मांग की।