होलिका दहन के साथ ही बनारस की फिजां में होली की मस्ती घुल गई। गलियों से लेकर गंगा घाट तक फागुन का उल्लास हर किसी के सिर चढ़कर बोला। सुबह से ही होली खेलने की शुरुआत हो गई। भद्रा की समाप्ति के बाद रविवार की मध्य रात्रि के उपरांत मुहूर्त काल में ढोल नगाड़ों की थाप, हर-हर महादेव के जयघोष के बीच होलिका दहन किया गया।