श्रावस्ती: बौद्ध स्थली श्रावस्ती के श्रीलंका बुद्ध विहार में बृहस्पतिवार को विशेष पूजन के साथ वर्षा वास पूजा का समापन किया गया। शानदनि रानागाना कला निकेतन श्रीलंका के सौजन्य से आयोजित कार्यक्रम में कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। इस दौरान बौद्ध भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरो ने महात्मा बुद्ध के जीवन की लीलाओं पर प्रकाश डाला। भगवान बुद्ध की लीलाओं का वर्णन करते हुए भिक्षु श्रद्धालोक ने कहा कि एक बार बुद्ध के कंधों से पानी और पांवों से लपटें निकलने लगीं। उनके शरीर से विभिन्न रंग भी निकलने लगे। इसे देखकर लोग दंग रह गए। बुद्ध की कई छवियां बनीं, कुछ खड़ी थीं और कुछ चल रही थीं। ये छवियां धम्म का प्रचार कर रही थीं। बुद्ध के प्रतिद्वंद्वी यह सब देखकर भौचक्के रह गए। जब उन्होंने चमत्कार का जवाब देने की कोशिश की, तो वे हिल भी नहीं सके। इस दौरान अचानक बारिश होने लगी। बारिश में सिर्फ वही भीगे जो मन में भीगना चाहते थे। बारिश के बाद तेज हवा चली। बुद्ध ने अपने ही हमशक्ल के साथ धम्म पर वाद-विवाद किया। इसे सुनकर लोगों को चमत्कारिक शक्तियों का ज्ञान हुआ। लोगों को लगा कि बुद्ध ही असली विजेता, बेहतर इन्सान और बेहतर शिक्षक हैं। इस घटना के बाद वहां जमा 90 हजार लोगों ने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया। महायान परंपरा के अनुसार बुद्ध अपनी मृत माता अभधम्म को दीक्षा देने के लिए स्वर्ग की ओर निकल पड़े।