मेरठ। सरधना धर्म नगरी सरधना इन दिनों सिद्धों की महाआराधना में लीन है। 13 से 20 सितंबर 2025 तक चल रहे 25 समवशरणों के सिद्ध चक्र महामंडल विधान में प्रतिदिन प्रातः 6 बजे से अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन विधान आयोजित किए जा रहे हैं। यह भव्य आयोजन मुनि श्री निश्चित सागर महाराज के सान्निध्य तथा प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी अंकित भैया के निर्देशन में चल रहा है। बुधवार को विधान का पांचवां दिन संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने प्रभु चरणों में 256 अर्घ समर्पित कर कर्मों के दहन विधान के माध्यम से सिद्धों की आराधना की। इसके पश्चात मुनिश्री ने कहा कि कर्मों का दहन ही संसार से मुक्ति का प्रथम द्वार है, और यह द्वार भक्ति से खुलता है। जो आज इस विधान में सहभागी बनें, वे सौभाग्यशाली हैं जिन्होंने अपने भावों को उज्जवल बनाकर प्रभु भक्ति में स्वयं को समर्पित किया है। मुनि ने यह भी कहा कि सरधना समाज का सौभाग्य है जो इतने विशाल और पवित्र विधान का आयोजन कर सका, जिससे सम्पूर्ण क्षेत्र में प्रभु की जय-जयकार गूंज रही है। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के उपदेशों को आत्मसात करते हुए उनके चरणों में नमोस्तु अर्पित किया और पूरे भक्ति भाव से कार्यक्रम में भाग लिया। शांतिधारा के पुण्यार्जक राजकुमार जैन, पंकज जैन, अमरीश जैन, विकास जैन रहे।