दि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल की ओर से मंगलवार को लखनपुर स्थित सभागार में कोड ऑफ एथिक्स एवं स्टैंडर्ड्स ऑफ ऑडिटिंग विषय पर गोष्ठी हुई। इसमें वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ऑडिट प्रक्रिया में दस्तावेजों के माध्यम से सत्यापन अत्यंत आवश्यक है, जो पारदर्शिता बनाए रखने में सहायक होता है। कानपुर। दि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल की ओर से मंगलवार को लखनपुर स्थित सभागार में कोड ऑफ एथिक्स एवं स्टैंडर्डस ऑफ ऑडिटिंग विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि ऑडिट को दस्तावेजों के जरिए सत्यापित करना अहम होता है। इससे ऑडिट प्रक्रिया में पारदर्शिता रहती है। सीए प्रशांत रस्तोगी ने बताया कि किसी भी ऑडिट पेपर या रिपोर्ट में समर्थन (समर्थित साक्ष्य) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यही ऑडिट की विश्वसनीयता और गुणवत्ता को मजबूत बनाती है। स्टैंडर्ड्स ऑफ ऑडिटिंग में भी इस बात पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने बताया कि सभी सीए फर्म के लिए पीईईआर समीक्षा एक जनवरी 2026 से लागू हो रही है। सीए शाश्वत गुप्ता ने बताया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के पेशे में स्वायत्ता, आत्मविश्वास, प्रोफेशनल क्षमता और ऑडिट मानकों के अनुपालन से ही पेशा की गरिमा के साथ करदाताओं के बीच भरोसा और विश्वास को बनाए रखा जा सकता है। सीए संस्थान का नैतिक ढांचा केवल दिशानिर्देश नहीं, बल्कि पेशा की आत्मा है। जिसका पालन हर सदस्य के लिए आवश्यक है। इस मौके पर सीए नितिन ओमर, अमित अग्रवाल,आरपी सिंह, बंदना मिश्रा, सौम्या गुप्ता, दिनेश निगम, अमीश गुप्ता आदि थे।