फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आचार्य शुक्ल के गांव में किताबें हैं, पाठक नहीं, साल में एक दिन खुलता है पुस्तकालय

हिंदी साहित्य के महान समालोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल के पैतृक गांव अगौना में उनकी साहित्यिक विरासत पाठकों की बाट जोह रही है। पैतृक आवास पर बने पुस्तकालय एवं वाचनालय में किताबें तो मौजूद हैं, लेकिन उन्हें पढ़ने वालों की संख्या लगातार घटती गई। अब लोगों की रुचि न होने के कारण पुस्तकालय साल में केवल एक दिन आचार्य शुक्ल के जन्मदिवस अश्विन पूर्णिमा पर खुलता है। पुस्तकालय के संरक्षक डॉ. केपी मिश्र ने बताया कि 18 अक्टूबर 2001 को तत्कालीन मुख्यमंत्री और देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसका शिलान्यास किया था। शुरुआती वर्षों में लोग यहां अध्ययन के लिए आते थे, लेकिन धीरे-धीरे संख्या कम होती गई।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें