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52 दुर्लभ शिवलिंगों में एक लोधेश्वर, 200 करोड़ से बनेगा महादेवा कॉरिडोर

बाराबंकी। महादेवा में अब श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन के साथ ठहरने और स्नान-ध्यान की सुविधा भी मिलेगी। रामनगर तहसील के महादेवा गांव स्थित लोधेश्वर महादेव धाम में करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर महादेवा कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। पृथ्वी पर मौजूद 52 दुर्लभ शिवलिंगों में से एक माने जाने वाले लोधेश्वर महादेव के दर्शन के लिए हर साल 20 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। कॉरिडोर को मंजूरी दिलाने के लिए दरियाबाद के विधायक एवं प्रदेश सरकार में खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने पैरवी की थी। मंजूरी मिलने के बाद अब निर्माण कार्य शुरू हो गया है। परिसर में कहीं पिलर खड़े किए जा रहे हैं तो कहीं मिट्टी की भराई हो रही है। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह के अनुसार, कॉरिडोर में श्रद्धालुओं के ठहरने से लेकर स्नान-ध्यान तक की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। ठहरने से स्नान-ध्यान तक की सुविधा महादेवा कॉरिडोर का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि परियोजना के तहत यहां आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने से लेकर स्नान-ध्यान तक की व्यवस्था होगी। इससे दूर-दराज से आने वाले भक्तों को सहूलियत मिलने की उम्मीद है। महाशिवरात्रि और अन्य प्रमुख धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में कॉरिडोर विकसित होने से धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। विधायक की पैरवी पर मिली मंजूरी महादेवा धाम के विकास के लिए दरियाबाद विधायक और प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने कॉरिडोर परियोजना की पैरवी की थी। इसके बाद परियोजना को मंजूरी मिली। करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित कॉरिडोर का निर्माण शुरू हो चुका है। फिलहाल शुरुआती चरण में कहीं पिलर खड़े किए जा रहे हैं तो कहीं मिट्टी की भराई की जा रही है। निर्माण कार्य आगे बढ़ने के साथ धाम के विकास की तस्वीर भी बदलने की उम्मीद है। महाभारत काल से जुड़ी हैं मान्यताएं लोधेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं से जुड़ा है। प्रचलित कथा के अनुसार, पंडित लोधेराम अवस्थी को स्वप्न में भगवान शिव ने दर्शन दिए थे। इसके बाद खेत में खुदाई के दौरान शिवलिंग मिलने की मान्यता है। कहा जाता है कि लोधेराम अवस्थी ने उसी स्थान पर मंदिर बनवाया। उनके नाम के 'लोधे' और भगवान शिव के 'ईश्वर' से मंदिर का नाम लोधेश्वर पड़ा। महादेवा धाम को महाभारत काल से जोड़कर भी देखा जाता है। मान्यता है कि महाभारत के बाद पांडवों ने यहां महायज्ञ किया था। मंदिर परिसर में स्थित पांडव कूप को भी इसी परंपरा से जोड़ा जाता है। महाशिवरात्रि पर उमड़ता है आस्था का सैलाब महाशिवरात्रि पर महादेवा में विशाल मेला लगता है। कांवड़ लेकर आने वाले शिवभक्त 'बम-भोले' के जयकारों के साथ मंदिर पहुंचते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। हर साल लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के कारण यह धाम बाराबंकी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। कॉरिडोर परियोजना से यहां धार्मिक पर्यटन को विस्तार मिलने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।

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