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Video: माचिस की डिब्बी से दीवार तक, धार्मिक तस्वीरों के अपमान के खिलाफ 20 साल से लड़ाई

अयोध्या में माचिस की डिब्बी, बीड़ी और दूसरे उत्पादों पर देवी-देवताओं की तस्वीरें छापकर बिक्री करना और इस्तेमाल के बाद उन्हीं तस्वीरों का सड़क-कूड़े में पड़े मिलना धार्मिक आस्था के अपमान का कारण बन रहा है। इसे रोकने के लिए पश्चिम बंगाल निवासी गौतम गोस्वामी पिछले करीब 20 वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अयोध्या से लखनऊ जाते समय रूदौली के भेलसर में अमर उजाला की टीम से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि अब इस मुद्दे को लेकर लोगों को जागरूक करने के साथ आंदोलन भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि धार्मिक तस्वीरों के व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट से लेकर राष्ट्रपति तक पत्र भेज चुके हैं।सुप्रीमकोर्ट के रोक के बावजूद धार्मिक तस्वीरों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कंपनियों द्वारा रोक नहीं लगाया जा रहा है। उनका कहना है कि आस्था का सम्मान केवल हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है। हिंदू, मुस्लिम, सिख समेत सभी धर्मों के धार्मिक प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए। चार राज्यों में युवाओं को कर रहे जागरूक गौतम गोस्वामी ने बताया कि वह मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भ्रमण कर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। अभियान में युवाओं को खास तौर पर जोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि धार्मिक तस्वीरों को ऐसे उत्पादों पर छापने से बचना चाहिए, जिनका इस्तेमाल होने के बाद डिब्बे या पैकेट कूड़े में पहुंच जाते हैं। गंदगी रोकने को लगाई तस्वीर, उसी पर थूक दिया उन्होंने कहा कि कई जगह घरों और दुकानों की बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं की तस्वीरें इसलिए लगा दी जाती हैं कि वहां कोई गंदगी न करे। लेकिन कुछ लोग उसी तस्वीर के सामने पान मसाला खाकर थूक देते हैं। इससे आस्था का अपमान होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को नजरअंदाज करने के बजाय प्रशासन को शिकायत कर कार्रवाई की मांग की जाएगी। गौतम गोस्वामी ने कहा कि करीब दो दशक से कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद अब अभियान को जनआंदोलन का रूप दिया जाएगा। धार्मिक आस्था से खिलवाड़ और उसके अपमान के खिलाफ लोगों को एकजुट कर आवाज उठाई जाएगी।

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