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अटूट आस्था का प्रतीक है अयोध्या का विघ्नेश्वरनाथ धाम शिवाला मंदिर

भूपेन्द्र सिंह Updated Sat, 14 Feb 2026 01:04 PM IST

रामनगरी अयोध्या के मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र के रमपुरवा में तमसा नदी के तट पर स्थित विघ्नेश्वरनाथ महादेव धाम शिवाला मंदिर लोगों की अटूट आस्था का केंद्र है।भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर परिसर में स्थित कुंड में स्नान करने मात्र से विकारों से मुक्ति मिलती है।आसपास व दूरदराज के लोग यहां मंत्र सिद्धि करने आते है।हर वर्ष शिवरात्रि से पूर्व शिव बारात व विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। विघ्नेश्वरनाथ धाम शिवाला मंदिर का निर्माण पांच सौ वर्ष पूर्व 1734 ई.में राजा दर्शन सिंह द्वारा कराया गया।यह नागर शैली से निर्मित अष्ट मंडपम व चौसठ योगिनियों वाला तंत्र आधारित शिव मंदिर है।इसके भीतर 300 फुट लंबी सुरंग व दस फुट लंबा व दस फीट चौड़ा ध्यान कक्ष भी स्थापित है, अयोध्या का यह पहला शिव मंदिर है जो इतना विशालकाय है। यहां स्थापित शिवलिंग का आकार लगभग 4.5× 4 फीट का है। मंदिर का गर्भगृह करीब 25 फीट भीतर है, जहां सूर्योदय के समय सूर्य की पहली किरण भगवान शिव पर पड़ती है तथा सूर्य की अंतिम किरण भगवान शिव पर पड़ने के साथ ही सूर्यास्त होता है। यहां स्थापित शिवलिंग में इस समय स्वयमेव त्रिपुंड का आकार व जटा विकसित हो रही है,जो किसी चमत्कार से कम नही है।मंदिर परिसर में निर्मित कुंड में 128 तीर्थो का जल समाहित है। इस मंदिर का जीर्णोद्धार वर्ष 2015 में प्रमुख पुजारी अमित योगी ने सर्व समाज के सहयोग से कराया,और 2010 में चोरी हुआ कलश 2016 में पुनः स्थापित कराया।पुजारी अमित जोगी ने बताया कि मन्दिर के दक्षिण करीब दो किलोमीटर दूर राजा दर्शन सिंह ने शाहगंज स्टेट का निर्माण कराया और वहां पर अपने पुत्र मानसिंह की ताजपोसी की।स्टेट से मंदिर तक जाने के लिए दो किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण भी कराया जो अब मात्र 300 फीट ही बची है।जिससे होकर मंदिर के गर्भगृह में जाया जा सकता है।

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