मिलावट के साथ खाद्य सामग्री के रखरखाव में भी लापरवाही बरती जा रही है। खाद्य विभाग की टीम ने दो टैंकरों में भरा 1998 लीटर दूध नष्ट कराया है। इसकी अवैध तरीके से बिक्री हो रही थी। दूध में दुर्गंध आने के साथ मक्खी-मच्छर भी तैरते मिले। मिलावटी और सेहत के लिए असुरक्षित मानते हुए टीम ने इसे नष्ट कराते हुए जांच को नमूने लिए हैं। सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि मिलावटी दूध की बिक्री की शिकायत पर एमजी रोड से गुजर रहे दूध से भरे टैंकरों को रोका। जांच करने पर दूध का रंग मटमैला था, दुर्गंध भी आ रही थी। इसमें मक्खी-मच्छर भी पड़े थे। इनको छान कर नहीं भरा गया था। दूध के लिए जरूरी तापमान भी नियंत्रित नहीं किया जा रहा था। चालक अजय निवासी जलेसर से इसका लाइसेंस और बिल मांगा तो दिखा नहीं पाया। इसमें 998 लीटर दूध को नष्ट करा दिया। इसकी कीमत 54890 रुपये थी। दूसरे टैंकर का भी यही हाल रहा। इसमें 1000 लीटर दूध भरा हुआ था। इसकी कीमत करीब 55 हजार रुपये बताई। चालक उमेश निवासी जलेसर के पास भी दूध की बिक्री के बिल और लाइसेंस नहीं मिला। पूछताछ में दोनों पानी की मिलावट की बात स्वीकारी, लेकिन इसमें अन्य रसायन मिलने की आशंका मिली। जांच में नमूने फेल मिलने पर विक्रेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इसके अलावा मुड़ी चौराहा से दो टैंकरों से दो नमूने लिए। यहीं संचालित डेयरी से भी दूध का नमूना लिया है। अहारन और नादऊ से दूध की टंकी और फतेहपुर सीकरी की भोला डेयरी और लाइफ डेयरी से दूध का नमूना लिया है। टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र चौरसिया, आशुतोष कुमार सिंह, राकेश यादव, श्वेता चक्रवर्ती आदि रहे।