लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। शहर के सभी प्रमुख अस्पतालों और कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार को लेडी लॉयल अस्पताल में अग्निशमन विभाग और अस्पताल प्रशासन ने संयुक्त रूप से मॉक ड्रिल का आयोजन किया। हालांकि, सुरक्षा दावों की पोल खोलती इस मॉक ड्रिल के शुरुआती नतीजे बेहद चिंताजनक रहे। सोमवार को अस्पताल परिसर में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए जब गार्ड्स को अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) चलाने को कहा गया, तो पहले प्रयास (फर्स्ट टेक) में मिशन पूरी तरह फेल साबित हुआ। गार्ड्स को यंत्र को सही से इस्तेमाल करना नहीं आया। हालांकि, अग्निशमन कर्मियों की देखरेख में जब दोबारा प्रयास किया गया, तब जाकर वे आग पर काबू पाने और यंत्र को सही तरीके से संचालित करने में कामयाब हो सके। अस्पताल की सुरक्षा को लेकर बड़ी लापरवाही तब सामने आई जब परिसर की दूसरी साइड में लगी फायर फाइटिंग लाइनों और हाइड्रेंट की जांच की गई। जैसे ही पानी का प्रेशर चेक करने के लिए वाॅल्व खोला गया, सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। लंबे समय से बंद पड़े होने के कारण पाइपलाइनों के भीतर भारी मात्रा में कचरा और सिल्ट जमा हो चुकी थी, जिसकी वजह से पानी का प्रेशर आगे बढ़ ही नहीं सका। यदि इस दौरान अस्पताल में सचमुच कोई बड़ी अनहोनी हो जाती, तो यह तकनीकी खराबी भारी तबाही का कारण बन सकती थी।