जहां कभी मुसाफिरों की चहल-पहल थी, व्यापारियों के ऊंट-घोड़े सुस्ताते थे और बाजार की रौनक देखते ही बनती थी, आज उस नूरजहां की सराय स्मारक पर सन्नाटा और बदहाली का पहरा है। रामबाग स्थित यह ऐतिहासिक धरोहर अब वक्त की गर्द में मिलकर गुम हो रही है। इस संरक्षित धरोहर पर सरकारी उपेक्षा की ऐसी मार पड़ी है कि विरासत धीरे-धीरे मलबे में तब्दील हो गई। इसके खंडहर सिसक रहे हैं और दीवारों की गहरी दरारें चीख-चीखकर अपने वजूद की गुहार लगा रही हैं।