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18 से 72 हजार हो जाएगी केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी?

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Tue, 01 Sep 2026 02:09 PM IST

केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर अब 8वें वेतन आयोग पर टिकी है। वेतन, पेंशन और भत्तों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। खास तौर पर फिटमेंट फैक्टर इस पूरी प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा बना हुआ है। अलग-अलग कर्मचारी संगठन सरकार के सामने अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग रख रहे हैं। अगर इन प्रस्तावों में से किसी को मंजूरी मिलती है तो केंद्रीय कर्मचारियों के न्यूनतम मूल वेतन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

3 सितंबर को 8वें वेतन आयोग के गठन के 10 महीने पूरे होने जा रहे हैं। आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति सेवानिवृत्त रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। फिलहाल आयोग देशभर में कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और दूसरे हितधारकों के साथ बातचीत और परामर्श कर रहा है।

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?

फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है जिसके आधार पर मौजूदा मूल वेतन को संशोधित करके नया मूल वेतन तय किया जाता है। यही वजह है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता बनी हुई है।

फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 18 हजार रुपये है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था। इसके लागू होने के बाद न्यूनतम मूल वेतन 7 हजार रुपये से बढ़कर 18 हजार रुपये हुआ था।

इससे पहले 6वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 था। अब कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग में इससे काफी ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।

3.61 फिटमेंट फैक्टर से कितना होगा वेतन?

सर्वे ऑफ इंडिया की मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन यानी MSA ने 3.61 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा है।

अगर सिर्फ इस प्रस्ताव को आधार मानकर गणना की जाए तो 18 हजार रुपये का मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन बढ़कर करीब 64,980 रुपये, यानी लगभग 65 हजार रुपये हो सकता है।

हालांकि यह आंकड़ा अंतिम वेतन नहीं है। यह सिर्फ प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर को मौजूदा मूल वेतन से गुणा करके निकाला गया अनुमान है।

3.833 फैक्टर की मांग, वेतन 69 हजार के करीब

दूसरी ओर नेशनल काउंसिल-जेसीएम स्टाफ साइड और भारत पेंशनर्स समाज ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है।

अगर इस प्रस्ताव को स्वीकार किया जाता है तो 18 हजार रुपये का न्यूनतम मूल वेतन बढ़कर करीब 69 हजार रुपये हो सकता है।

यानी 3.61 और 3.833 के प्रस्तावों के बीच भी कर्मचारियों के संभावित न्यूनतम मूल वेतन में कई हजार रुपये का अंतर बन सकता है।

4.00 फिटमेंट फैक्टर से 72 हजार रुपये?

सबसे ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ यानी BPMS की ओर से सामने आई है। संगठन ने 4.00 फिटमेंट फैक्टर लागू करने का सुझाव दिया है।

अगर 4.00 का फिटमेंट फैक्टर स्वीकार होता है तो 18 हजार रुपये का न्यूनतम मूल वेतन बढ़कर करीब 72 हजार रुपये हो सकता है।

यानी 3.61 के प्रस्ताव से निकलने वाले करीब 65 हजार रुपये और 4.00 के प्रस्ताव से निकलने वाले 72 हजार रुपये के बीच लगभग 7,020 रुपये प्रति माह का अंतर होगा।

क्या सच में 72 हजार होगी न्यूनतम सैलरी?

यहां सबसे जरूरी बात यह है कि 65 हजार, 69 हजार और 72 हजार रुपये के आंकड़े अंतिम वेतन नहीं हैं। ये अलग-अलग कर्मचारी संगठनों की मांग और मौजूदा मूल वेतन के आधार पर निकाले गए अनुमान हैं।

वास्तविक वेतन बढ़ोतरी सिर्फ फिटमेंट फैक्टर से तय नहीं होगी। नए वेतन मैट्रिक्स, महंगाई भत्ता, दूसरे भत्तों और आयोग की अंतिम सिफारिशों का भी इसमें अहम योगदान होगा।

फिलहाल 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठन अपनी मांगें रख रहे हैं और परामर्श की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आयोग किस फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश करता है।

यानी 65 हजार, 69 हजार या 72 हजार रुपये फिलहाल ये सिर्फ संभावित आंकड़े हैं। वास्तविक वेतन कितना बढ़ेगा, इसका जवाब 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट और सरकार के फैसले के बाद ही साफ होगा।

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