हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली में मस्जिद निर्माण मामले पर राजनीति भी तेज हो गई है। बुधवार को विधानसभा सदन में मामले पर विधायक हरीश जनारथा और मंत्री अनिरुद्ध सिंह आमने-सामने हो गए। वहीं मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि कानून अपने हिसाब से काम कर रहा है। हमें सभी की भावनाओं का सम्मान करना होगा। गुरुवार को लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सांसद असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर पलटवार किया है। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मोहब्बत है। यहां किसी के लिए नफरत नहीं है। समाज के हर वर्ग को आगे ले जाना हमारा दायित्व है। उनकी सुरक्षा करना हमारा दायित्व है और सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में मस्जिद निर्माण का जो मामला है, उसमें सरकार ने संज्ञान लिया है। कल इस सबंध में विधानसभा में भी वक्तव्य दिया है, जिसमें स्पष्ट तरीके से कहा गया कि सरकार किसी भी तरीके के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह मामला एमसी कोर्ट में लंबित है और काफी समय से इसकी सुनवाई चल रही है। कोर्ट के फैसले अनुसार सरकार की ओर से इसमें कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक देवभूमि है। हिमाचल प्रदेश पहला राज्य है, जहां पर पूर्व कांग्रेस सरकार ने धर्मांतरण का कानून लागू किया। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि शिमला शहर के लोगों की चिंता है कि प्रदेश में बाहरी राज्यों से कुछ लोग आ रहे हैं। यह लोग यहां पर झूठी पहचान के साथ काम कर रहते हैं। इसे कानून व्यवस्था की दृष्टि से देखे जाने की जरूरत है। कोई भी व्यक्ति बाहरी राज्य से हिमाचल में आकर झूठी पहचान से काम करे, यह प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह है। इस पर सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी। पहला अधिकार रोजगार का हिमाचल के लोगों का बनता है। बाहर के लोगों का भी स्वागत है। उन्होंने कहा कि कहा कि कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। सबको साथ लेकर आगे चलना व सबके हित साधना सरकार का दायित्व है।