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शिमला में नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर, आठ महीने में दो बड़ी कार्रवाई

नशा तस्करी के खिलाफ शिमला पुलिस ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए अब तस्करों से जुड़ी कथित अवैध संपत्तियों और निर्माणों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में चिड़गांव-रोहड़ू मार्ग पर लंबाखाटल के समीप लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की सरकारी जमीन पर किए गए अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया। पुलिस और लोक निर्माण विभाग की संयुक्त कार्रवाई में पांच दुकानों को गिराया गया, जबकि एक स्टोर को अपने कब्जे में लिया गया। पुलिस के अनुसार, यह मामला चिट्टा तस्करी से जुड़ा है। पुलिस थाना कोटखाई में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामले की समीक्षा के दौरान सरकारी जमीन पर दुकानों और एक स्टोर के निर्माण की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करते हुए संबंधित निर्माणों को हटाया गया। शिमला पुलिस ने इससे पहले आठ अक्तूबर को रोहड़ू क्षेत्र में नशा तस्करी से जुड़े एक आरोपी के अवैध रेस्टोरेंट को भी बुलडोजर से ध्वस्त किया था। पुलिस के मुताबिक, जिले में नशा तस्करी से जुड़े मामलों में अवैध संपत्तियों और निर्माणों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की जा रही है। पिछले आठ महीनों में नशा तस्करी से जुड़े दो मामलों में संपत्तियों या निर्माणों पर कार्रवाई की गई है। नशा तस्करी से अर्जित संपत्तियों की पहचान के लिए शिमला पुलिस ने फरवरी से सत्यापन अभियान शुरू किया है। इसके तहत अब तक 940 संपत्तियों का सत्यापन किया जा चुका है। इनमें से 58 संभावित अवैध संपत्तियों को चिह्नित किया गया है। पुलिस के अनुसार, इन संपत्तियों की वैधता और नशा तस्करी से उनके संभावित संबंध की जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्षों और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। शिमला पुलिस की रणनीति नशा तस्करी के पूरे नेटवर्क को कमजोर करने पर केंद्रित है। इसके लिए मुख्य सप्लायरों तक पहुंचने के उद्देश्य से बैकवर्ड लिंकेज की जांच की जा रही है। साथ ही, नशे के कारोबार से अर्जित संपत्तियों की पहचान करने और नियमानुसार उन्हें जब्त करने के लिए वित्तीय जांच भी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि अभियान के तहत मादक पदार्थों की बरामदगी, मुख्य सप्लायरों की पहचान, वित्तीय नेटवर्क की जांच और नशा तस्करी से जुड़े संभावित ठिकानों पर कार्रवाई जारी रहेगी। उद्देश्य नशे के अवैध कारोबार को केवल गिरफ्तारी तक सीमित रखने के बजाय उसके आर्थिक आधार पर भी चोट पहुंचाना है।

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