राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला ने महासू आर्ट सोसाइटी के सहयोग से इंद्रेणी के पांचवें संस्करण की कला प्रदर्शनी रविवार से गेयटी थियेटर में शुरू की। प्रदर्शनी में मिट्टी के चूल्हे पर बन रही मक्की की रोटी का चित्र दर्शकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। इस चित्र में ग्रामीण जीवन की सुंदर झलक दिखाई गई है। चूल्हे पर इस्तेमाल होने वाले लोहे के बर्तनों को भी चित्र में बारीकी से उकेरा गया है। इस कलाकृति को राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला की तृतीय वर्ष की छात्रा ज्येतिसना ने तैयार किया है। वह दाड़लाघाट के काकड़ा क्षेत्र की रहने वाली हैं। ज्येतिसना ने बताया कि वर्तमान समय में मिट्टी के चूल्हों की परंपरा गांवों में भी धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। अधिकतर लोग अब गैस चूल्हों का इस्तेमाल करने लगे हैं। ऐसे में उन्होंने ग्रामीण जीवन की इस पुरानी परंपरा को अपनी कलाकृति के माध्यम से कैनवास पर उकेरने का प्रयास किया है। प्रदर्शनी में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड और नेपाल की 24 महिला कलाकारों की 100 से अधिक कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। यहां यथार्थवाद, अमूर्त कला, पहाड़ी लघु चित्र परंपरा और समकालीन कला शैलियों का सुंदर संगम देखने को मिल रहा है। कलाकारों ने प्रकृति, जीवन, भावनाओं और अपने आसपास की दुनिया को अलग-अलग दृष्टिकोण से कैनवास पर प्रस्तुत किया है। प्रदर्शनी में ग्रामीण जीवन, प्राकृतिक सौंदर्य और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े विषयों को विशेष स्थान दिया गया है। अलग-अलग कला शैलियों और विषयों के कारण दर्शकों को विविध अनुभव मिल रहे हैं। कलाकृतियों के माध्यम से कलाकारों ने समाज, संस्कृति और बदलते जीवन की तस्वीर पेश करने का प्रयास किया है। इंद्रेणी के पांचवें संस्करण की इस प्रदर्शनी का क्यूरेशन महासू आर्ट सोसाइटी शिमला के संस्थापक डॉ. भादर सिंह ने किया है। आयोजन का उद्देश्य महिला कलाकारों को मंच प्रदान करना और उनकी रचनात्मक प्रतिभा को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाना है।