हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ पिछले 56 दिन से लगातार प्रदेश के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों की प्रमोशन तथा विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बहाल करने के लिए आंदोलनरत हैं । हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों ने जहां कृषि, वानिकी, बागवानी जैसे दैनिक जीवन से जुड़े क्षेत्रों में इस प्रदेश के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाई, वहीं शिमला में स्थित प्रदेश के सबसे पुराने विश्वविद्यालय ने पिछले साढ़े पांच दशकों से प्रदेश की जनता को विज्ञान, कला, विधि, गणित, भाषा, चिकित्सा, प्रशासन और राजनीति जैसे अनेक विषयों में बेहतरीन उच्च शिक्षा प्रदान की है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अध्यापक संघ पिछले पचपन दिनों से धरना-प्रदर्शन करके सरकार से निवेदन कर रहा है कि वह राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026 को रोककर शिक्षकों के साथ चर्चा करे। लेकिन सरकार ने इस पर संज्ञान लेने के बजाय इसे राज्यपाल की संस्तुति के लिए भेज दिया है। इसके विरोध में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षक, गैर शिक्षक कर्मचारी, शोधार्थी और पूर्व छात्र 5 नवंबर को सुबह 11 बजे विश्वविद्यालय के सभागार में एकत्रित होकर चर्चा करेंगे और आगे के आंदोलन की रणनीति बनाएंगे। इस विधेयक से प्रदेश में उच्च शिक्षा और उसके केंद्रों के अस्तित्व पर संकट आ जाएगा।